Main Article Content

Abstract

मनुष्य की यह प्राकृतिक प्रवृत्ति होती है कि वह स्वच्छ रहे। स्वच्छता केवल अच्छे स्वास्थ्य का ही नही , बल्कि आत्मसम्मान का भी मूलाधार है और इसका मानव जीवन से गहरा सम्बन्ध है। स्वच्छता का अहसास भी जुडा़ होता है। इसके कारण मनुष्य में आत्मसम्मान का बोध होता है। शिक्षा और स्वास्थ्य की तरह ही स्वच्छता भी भारत में फैली गरीबी के विरूद्ध लड़ने में एक महत्वपूर्ण हथियार है। इतिहास हमें बताता है कि मूलभूत स्वच्छता में किया गया निवेश गरीबी , बीमारी तथा असमय होने वाली मृत्यु से छुटकारा दिलाने में लोगो की मदद कर सकता है।                    

Article Details